गति का नियम

न्यूटन से सैकड़ों साल पहले प्रसिद्ध भारतीय दार्शनिक आचार्य कणाद ने अपने वैशेषिक सूत्र में गति के नियमों को स्थापित कर दिया था। यह दावा है नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के चेयरमैन और शोभित विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियांक भारती का। 
उनके शोधपत्र, आचार्य कणाद : फादर ऑफ फिजिक्स एंड ट्रू इनवेंटर ऑफ लॉ ऑफ मोशंस के प्रकाशन के बाद विज्ञान जगत में इसे लेकर हलचल है। यह शोधपत्र इंटरनेशनल जनरल ऑफ साइंस एंड इंजीनियरिंग के अक्तूबर के अंक में प्रकाशित हुआ है। इस जर्नल का इपैक्ट फैक्टर तीन है। असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियांक भारती ने शोधपत्र के माध्यम से बताया है कि न्यूटन ने 1686 में गति का नियम प्रतिपादित किया था।
न्यूटन ने अपने शोधपत्र प्रिंसिपिया ऑफ मैथमैटिका में गति के तीन नियम खोले थे, जिसमें गुरुत्वाकर्षण शक्ति, गतिज ऊर्जा और मोमेंटम के बारे में सिद्धांत दिए गए थे, जबकि भारतीय दर्शनशास्त्र के वैशेषिक सूत्र के अनुसार आचार्य कणाद ने 600 बीसी में ही गति के नियमों को स्थापित कर दिया था। यानी न्यूटन से करीब 2500 साल पहले। ऐसे में स्पष्ट है कि गति के सिद्धांत के जनक न्यूटन नहीं बल्कि कणाद थे।
वैशेषिक सूत्र में दसवें चैप्टर में 373 श्लोक हैं, जिसमें से निम्नलिखित श्लोक गति के नियम को समझाते हैं। उदाहरण के तौर पर गति के पहले नियम को वैशेषिक सूत्र के पहले चैप्टर के पहले भाग में 20वें श्लोक में
संयोगविभगावेगानं कर्म समानम, न द्रव्यानां कर्म, द्रव्यश्रय्यगुणावां संयोगविभागेस्वकारणमनपेक्ष इति गुणलक्षणम।
दूसरा गति के नियम में
नोदनविससभावांनोर्ध्वं न त्थ्र्यिगगमनं, प्रयत्नविशेषातनोदनविशेष :  नोदन विशेषात उदासन विशेष 
इस आधार पर किया दावा
तीसरा नियम कार्यविरोधि कर्म दिया है। इन सभी श्लोकों का अर्थ हूबहू वही है जो न्यूटन का सिद्धांत कहता है। उदाहरण के तौर पर आचार्य कणाद और न्यूटन के सिद्धांत की समानता इस प्रकार समझी जा सकती है।
न्यूटन का गति का तीसरा सिद्धांत :  प्रत्येक क्रिया की सदैव बराबर एवं विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।
कणाद का गति का तीसरा सिद्धांत : कार्य विरोधि कर्म यानी कार्य (एक्शन), विरोधी (अपोजिट), एक्शन (यहां इसका आशय रिएक्शन है)

कौन थे आचार्य कणाद 
आचार्य कणाद का असल नाम कश्यप था। वह गुजरात के द्वारका के रहने वाले थे। वह दर्शन शास्त्र के बहुत बड़े ज्ञानी थे। उन्होंने वैशेषिका हिंदू दर्शन विद्यालय की स्थापना की थी। यह केंद्र दर्शन और गणित का बड़ा केंद्र था। उन्होंने अपने शोध वैशेषिक दर्शन में गति के नियमों को प्रतिपादित किया था। 

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