Friday, January 6, 2017

समय का महत्व

तलवारबाजी में कुशल एक योद्धा था। एक बार उसने अपने नौकर को अपनी पत्नी के साथ देख लिया। वहां की परंपरा के अनुसार, उसने नौकर को तलवार दी और युद्ध की चुनौती दी, ‘आज या तो तुम या मैं।’
नौकर को तो तलवार पकड़नी भी नहीं आती थी।  वह बोला, ‘स्वामी मैं आपका सम्मान करता हूं कि आप मुझ जैसे नौकर को ये अवसर दे रहे हैं। पर मैं तलवार चलाना नहीं जानता। मुझे कुछ समय दीजिए, ताकि मैं किसी के पास जाकर कुछ सीख सकूं।  योद्धा ने कहा, ‘ठीक है। जितना भी समय लो। मैं प्रतीक्षा करूंगा।’
वह एक अन्य योद्धा के पास गया। उसने कहा, ‘तुम वर्षों तक अभ्यास करोगो तो भी कुछ नहीं होगा। तुम्हारा स्वामी सर्वश्रेष्ठ तलवारबाज है। मेरी सलाह है कि यही लड़ाई का सही समय है। नौकर बोला, ‘मैं आपके पास सलाह के लिए आया हूं और आप कह रहे हैं, जा मर जा। 
योद्धा ने कहा, ‘हां, क्योंकि एक चीज निश्चित है-तुम्हारी मृत्यु। इसके अलावा तुम्हारे पास खोने के लिए कुछ नहीं है। पर तुम्हारे स्वामी की कई चीजें दांव पर हैं- पत्नी, पद, प्रतिष्ठा और वह एक बड़ा जमींदार भी है। वह अपनी पूर्णता में नहीं होगा, पर तुम हो सकते हो। तुम्हें होना ही होगा-जिस एक क्षण के लिए भी तुम्हारा ध्यान भटकेगा, वही आखिरी क्षण होगा। किसी और नियम-अनुशासन के बारे में फिलहाल मत सोचो। तलवार लो और युद्ध करो। नौकर लौट गया। 
मालिक ने कहा, ‘इतनी जल्दी सब सीख लिया?’ नौकर जोर से बोला, ‘कुछ सीखना नहीं है। मैं युद्ध के लिए तैयार हूं।’ 
योद्धा को विश्वास नहीं हो रहा था कि ऐसा क्या जादू हो गया है। वह घर से बाहर आया तो नौकर ने नियमों के अनुसार सिर झुकाया। उसके बाद नौकर ने तलवार चलानी शुरू कर दी। 
मालिक हक्का-बक्का था। एक एक्सपर्ट की नजर में कोई व्यक्ति जहां तलवार चलाता है, नौकर वहां नहीं चला रहा था। और वह जहां तलवार चलाता था, वहां कोई एक्सपर्ट सोच नहीं सकता था। जल्द ही योद्धा के कदम पीछे होने लगे। नौकर में थोड़ा और साहस आ गया। नौकर बस तलवार चला रहा था, बिना यह जाने कि क्यों, क्या उद्देश्य है और वह कैसी तलवार चला रहा है। वह अपनी मौत के भय से भी बाहर आ चुका था। जल्द ही उसने मालिक को किनारे कर दिया। 
अब मालिक को मृत्यु का डर सताने लगा। वह बोला, ‘रुको, मैं तुम्हें अपना सब कुछ देता हूं। मैं अब संन्यास के रास्ते जा रहा हूं। वह डर के मारे कांप रहा था। वह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर नौकर में यह साहस कहां से आया? उसमें यह चित्त की एकाग्रता कैसे आयी?  
लेकिन सच यही है कि ऐसी किसी भी खास स्थिति में किसी भी नियम-कायदे से अधिक उस स्थिति में होना, पूरी तरह वर्तमान को जीना, बहुत कुछ जाग्रत कर देने वाला होता है। 

No comments:

Post a Comment

Welcome to giteshs78.
Please enter your massage & comment.

Featured Post

Aeroplane की खोज

पौराणिक कथाओं में उड़न खटोले और विमान का जिक्र अकसर होता आया है. रामायण में जहां सीता का अपहरण करने के लिए रावण ने अपने प्राइवेट उड़न खटोले का...